शनिवार, 17 मार्च 2012
लाल सिंह
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बुंदेलखंड में ग्राम प्रधानी से शुरू हुआ दस्यु परिवारों का चुनावी सफर लोकसभा के बाद अब विधान सभा में भी पड़ाव डाल चुका है। देश और प्रदेश की सर्वोच्च पंचायतों में दाखिले का यह ‘सौभाग्य’ दस्यु ददुआ के परिवार को हासिल हुआ है। पहले भाई बाल कुमार सांसद बने और अब बेटे वीर सिंह की विधायक के रूप में ताजपोशी हुई है।चित्रकूट जनपद के पाठा क्षेत्र में दस्यु सरगनाओं को चुनाव का शौक एक दशक पहले सवार हुआ था। तब ददुआ की तूती बोलती थी। उसके फरमान पर वोट पड़ते थे। फिर ददुआ और उसके गिरोह के सदस्यों के परिवारों ने राजनीति में खुलकर कदम रखा। 2005 में ददुआ गैंग के सक्रिय हार्डकोर सदस्य सुग्रीव उर्फ अंगद की पत्नी नन्ही देवी वसिला गांव में प्रधान का चुनाव जीतीं।
ददुआ की लहुरी (छोटे भाई की पत्नी) रामबाई पटेल देवकली गांव की प्रधान चुनी गई। बाद में ददुआ का दाहिना हाथ कहे जाने वाले राधे की पत्नी सत्यवती पटेल शीतलपुर गांव से दो बार ग्राम प्रधान का चुनाव जीतीं। ददुआ का साला फूलचंद्र मानिकपुर में ब्लॉक प्रमुख का चुनाव निर्विरोध जीता। पुत्र वीर सिंह 2005 में ही चित्रकूट जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर निर्विरोध निर्वाचित हुआ।
बांदा-चित्रकूट संसदीय सीट पर जीत-हार पाठा के दस्यु सरगना ही तय करते रहे हैं। सपा, बसपा, भाकपा आदि के लिए समय-समय पर फरमान जारी हुए। जुलाई 2007 में ददुआ के मार दिए जाने के बाद भी भाई बाल कुमार मिर्जापुर से सपा के टिकट पर सांसद चुने गए। अब इस परिवार ने विधान सभा में भी अपनी दस्तक दे दी है। ददुआ के बेटे वीर सिंह को सपा प्रत्याशी के रूप में चित्रकूट (कर्वी) क्षेत्र के मतदाताओं ने अबकी 65,297 (35 फीसदी) वोट देकर विधायक चुन लिया है।
वीर सिंह का चचेरा भाई (बाल कुमार का पुत्र) राम सिंह भी पट्टी (प्रतापगढ़) विधान सभा क्षेत्र से सपा के टिकट पर चुनाव जीता है। पुलिस भले ही इन्हें दस्यु दलों के परिवारों से जोड़कर देखे लेकिन क्षेत्रीय लोगों ने उन्हें अपना रहनुमा बनाने में कोई परहेज नहीं किया है। ददुआ भी पाठा में क्षेत्रीय लोगों में अपनी काफी पैठ और हमदर्दी बनाए हुए था।
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