शनिवार, 2 जून 2012

ददुआ डकैत





चित्रकूट। एक शर्मीला सा नौजवान जनसंपर्क के लिए निकला है। उम्र करीब तीस साल। जिसने जिस गली में खींचा, वह वहीं दौड़ लगा देता है। घर-घर दस्तक। जो सामने आया विनम्रता से नमस्कार। बुजुर्ग हुआ तो सादर चरण स्पर्श। दो-तीन वाक्यों का ही संवाद-‘भैया ध्यान रखना, दादा मैं भी हूं मैदान में..।’ युवाओं का हुजूम आगे बताता चलता है-‘वीरसिंह आए हैं।’

वीरसिंह सपा से कर्वी के प्रत्याशी हैं। कर्वी यानी चित्रकूट का जिला मुख्यालय। सफेद पैंट-शर्ट पर बैगनी जैकेट पहने ठिगने कद के इस इंटरपास उम्मीदवार का बड़ा परिचय यह है कि वे इस इलाके में आतंक के पर्याय रहे कुख्यात डकैत ददुआ के बेटे हंै। हालांकि हत्या, लूट व डकैती के चार सौ आपराधिक मामलों में दर्ज ददुआ का जिक्र आते ही वह संकोच से हाथ जोड़कर कहते है, ‘मुझे ददुआ का लड़का मत कहिए। मैं आप ही के बीच का हूं।’

ददुआ 2007 में एनकाउंटर में मारा गया। दस विधानसभा सीटों के पांच सौ गांवों में उसकी आवाज पर वोट पड़ते थे। उसकी ख्वाहिश थी कि उसके परिवार से भी सियासत में सक्रिय हो। वीरसिंह ने पिता की अंतिम इच्छा पूरी की। वे 2006 में जिला पंचायत के निर्विरोध अध्यक्ष रह चुके हैं। ददुआ की छवि से एकदम उलट वीरसिंह मृदुल व्यवहार के लिए मशहूर हैं। कुर्मी बहुल इलाके में वीरसिंह इस समाज के सबसे युवा नेता हैं। सपा में उन्हें खुद मुलायम ने चुना।

वीरसिंह ने बताया, ‘मुझे अप्रैल में ही नेताजी ने कह दिया था कि तैयारी करो।’ राजनीति उनके लिए नई नहीं है। चाचा राजकुमार पटेल मिर्जापुर से सांसद हैं। भतीजा रामसिंह प्रतापगढ़ से विधायक। सभी सपा से। खुद ददुआ भी चुनावों के वक्त पसंदीदा उम्मीदवार को वोट देने का फरमान जारी करता था। कम्युनिस्ट पार्टी से सांसद रहे रामसजीवन को जिताने के संदेश गांव के लोगों को अब तक याद हैं। संदेश आते ही मजाल नहीं थी कि विरोधी उम्मीदवार को वोट मिल जाएं।
चित्रकूट। आखिरकार वीरसिंह मान गए। अब वह पट्टी (प्रतापगढ़) से ही विधानसभा का चुनाव लड़ेंगे वह भी समाजवादी पार्टी के टिकट से। 
पिछले महीने से वीरसिंह के चुनाव लड़ने न लड़ने की खबरों को सोमवार को वीरसिंह ने विराम दिया। उन्होंने अमर उजाला से बातचीत में साफ किया कि वह अब पट्टी से ही चुनाव लडे़ंगे और पार्टी मुखिया मुलायम सिंह यादव के आदेश का अक्षरश: पालन करेंगे। गौरतलब है कि वीरसिंह को अप्रैल में पार्टी ने अपना प्रत्याशी कर्वी विधानसभा क्षेत्र से घोषित किया था। इसके बाद लगभग आठ महीने बीतने के बाद अचानक उनकी जगह पार्टी ने सांसद आरके सिंह पटेल के पुत्र सुनील पटेल पर विश्वास दिखाया। वीरसिंह का टिकट कटने का विरोध हुआ, सांसद के पुतले तक फूंके गए। खास तौर पर पटेल बिरादरी के कुछ लोगों में इसकी जमकर प्रतिक्रिया हुई। इस बीच यह भी अफवाह उड़ी कि वीरसिंह सपा छोड़कर बसपा के पाले में जा सकते हैं और उनसे पार्टी के कुछ लोगों ने संपर्क किया है।
सोमवार को वीरसिंह से मोबाइल पर हुई बातचीत में उन्होंने साफ किया कि आज ही उनकी पार्टी मुखिया मुलायम सिंह से मुलाकात हुई है। नेताजी ने उनको पट्टी से ही लड़ने का निर्देश दिया है और आश्वस्त किया है कि हर संभव मदद की जाएगी। उन्होंने कहा कि एक सच्चे सिपाही होने के नाते वह नेताजी के आदेश को शिरोधार्य करते हैं। उन्होंने लोगों के सहयोग पर धन्यवाद दिया और कहा कि वह चित्रकूट से मातृभूमि के नाते लगाव रखते हैं और अपनों की मदद करते रहेंगे। बसपा में जाने की अटकलों पर उन्होंने कहा कि वह चित्रकूट। आखिरकार वीरसिंह मान गए। अब वह पट्टी (प्रतापगढ़) से ही विधानसभा का चुनाव लड़ेंगे वह भी समाजवादी पार्टी के टिकट से। पिछले महीने से वीरसिंह के चुनाव लड़ने न लड़ने की खबरों को सोमवार को वीरसिंह ने विराम दिया। उन्होंने अमर उजाला से बातचीत में साफ किया कि वह अब पट्टी से ही चुनाव लडे़ंगे और पार्टी मुखिया मुलायम सिंह यादव के आदेश का अक्षरश: पालन करेंगे। गौरतलब है कि वीरसिंह को अप्रैल में पार्टी ने अपना प्रत्याशी कर्वी विधानसभा क्षेत्र से घोषित किया था। इसके बाद लगभग आठ महीने बीतने के बाद अचानक उनकी जगह पार्टी ने सांसद आरके सिंह पटेल के पुत्र सुनील पटेल पर विश्वास दिखाया। वीरसिंह का टिकट कटने का विरोध हुआ, सांसद के पुतले तक फूंके गए। खास तौर पर पटेल बिरादरी के कुछ लोगों में इसकी जमकर प्रतिक्रिया हुई। इस बीच यह भी अफवाह उड़ी कि वीरसिंह सपा छोड़कर बसपा के पाले में जा सकते हैं और उनसे पार्टी के कुछ लोगों ने संपर्क किया है। सोमवार को वीरसिंह से मोबाइल पर हुई बातचीत में उन्होंने साफ किया कि आज ही उनकी पार्टी मुखिया मुलायम सिंह से मुलाकात हुई है। नेताजी ने उनको पट्टी से ही लड़ने का निर्देश दिया है और आश्वस्त किया है कि हर संभव मदद की जाएगी। उन्होंने कहा कि एक सच्चे सिपाही होने के नाते वह नेताजी के आदेश को शिरोधार्य करते हैं। उन्होंने लोगों के सहयोग पर धन्यवाद दिया और कहा कि वह चित्रकूट से मातृभूमि के नाते लगाव रखते हैं और अपनों की मदद करते रहेंगे। बसपा में जाने की अटकलों पर उन्होंने कहा कि वह


 


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